शनिवार, 26 जनवरी 2019

देह से परे स्त्री

देह से परे
सम्पूर्ण अस्तित्व है उसका
जहाँ विस्तार पाते हैं
उसके सपने, इच्छाएं
मर्जी और अधिकार भी।
उसको देह मात्र
समझने की भूल
छीन लेती है
उसका अस्तित्व, भविष्य
जीवन और प्यार भी।
चुभती निगाहों से दूर
उलझनों में खोयी
बुनती है वो
अपने जीवन के धागों से
एक प्यारा संसार भी।
माँ, पत्नी, बहन, दोस्त
इन रिश्तों के सिवा
खुद के भीतर
रखती है वो
नारी का आकार भी।
परम्परा, प्रतिष्ठा, अनुशासन
का ओढ़कर नक़ाब
मत छीनो उससे
उसके सपने, इच्छाएं
मर्जी और अधिकार भी।

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